तजरबे ने हुब्ब-ए-दुनिया से सिखाया एहतिराज़ पहले कहते थे फ़क़त मुँह से और अब करना पड़ा

“Experience taught me to abstain from this world's lure and greed; / What once was merely spoken words has now become the deed.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

तजुर्बे ने मुझे दुनिया के मोह से दूर रहना सिखा दिया; पहले मैं यह बात सिर्फ़ मुँह से कहता था, लेकिन अब वास्तव में ऐसा करना पड़ा।

विस्तार

शायर यहाँ ज़िंदगी के कड़वे तजुर्बों और खोखली नसीहतों के बीच के फ़र्क को बयां कर रहे हैं। अक्सर हम दुनियावी लालच और मोह-माया छोड़ने की बातें महज़ ज़ुबान से करते हैं, क्योंकि कहना बहुत आसान होता है। लेकिन जब ज़िंदगी की ठोकरें असलियत से रूबरू कराती हैं, तब उस दिखावे के वैराग्य को मजबूरी में सचमुच अपनी ज़िंदगी में उतारना पड़ता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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