ग़ज़ल

जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया

جب یاس ہوئی تو آہوں نے سینے سے نکلنا چھوڑ دیا
अकबर इलाहाबादी· Ghazal· 11 shers· radif: छोड़ दिया

यह ग़ज़ल अत्यधिक निराशा और मूक वेदना की उस अवस्था को दर्शाती है जहाँ दुख की इंतहा पर आहें, आँसू और दिल का मचलना भी थम जाता है। शिकारी के ज़ुल्म से जंगल में छाए सन्नाटे के प्रतीक के ज़रिये कवि ने दिल की ख़ामोशी और भावनात्मक शून्यता का मार्मिक चित्रण किया है।

Source: rekhta · HI

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया अब ख़ुश्क-मिज़ाज आँखें भी हुईं दिल ने भी मचलना छोड़ दिया
जब पूरी तरह निराशा छा गई तो सीने से आहें निकलना बंद हो गईं। अब आँखें भी अश्कों से खाली होकर सूख चुकी हैं और दिल ने भी मचलना या तड़पना छोड़ दिया है।
2
नावक-फ़गनी से ज़ालिम की जंगल में है इक सन्नाटा सा मुर्ग़ान-ए-ख़ुश-अलहाँ हो गए चुप आहू ने उछलना छोड़ दिया
ज़ालिम शिकारी के तीर चलाने से जंगल में एक सन्नाटा छा गया है; मधुर स्वर में गाने वाले पक्षी चुप हो गए हैं और हिरन ने कुलाँचे भरना छोड़ दिया है।
3
क्यूँ किब्र-ओ-ग़ुरूर इस दौर पे है क्यूँ दोस्त फ़लक को समझा है गर्दिश से ये अपनी बाज़ आया या रंग बदलना छोड़ दिया
तुम्हें इस ज़माने पर इतना घमंड क्यों है और तुमने आसमान (किस्मत) को अपना दोस्त क्यों समझ लिया है? क्या वह चक्कर काटने से बाज़ आ गया है या उसने अपने रंग बदलना छोड़ दिया है?
4
बदली वो हवा गुज़रा वो समाँ वो राह नहीं वो लोग नहीं तफ़रीह कहाँ और सैर कुजा घर से भी निकलना छोड़ दिया
हवा का रुख़ बदल गया है, वह ज़माना बीत चुका है, और अब न वे रास्ते रहे और न वे लोग। ऐसे में मनोरंजन और सैर-सपाटे की तो बात ही क्या, मैंने अब घर से बाहर निकलना भी छोड़ दिया है।
5
वो सोज़-ओ-गुदाज़ उस महफ़िल में बाक़ी न रहा अंधेर हुआ परवानों ने जलना छोड़ दिया शम्ओं ने पिघलना छोड़ दिया
उस महफ़िल में वह दर्द और तड़प अब बाक़ी नहीं रही, बड़ा अंधेर हो गया है; परवानों ने जलना छोड़ दिया है और शम्ओं ने पिघलना छोड़ दिया है।
6
हर गाम पे चंद आँखें निगराँ हर मोड़ पे इक लेसंस-तलब उस पार्क में आख़िर ऐ 'अकबर' मैं ने तो टहलना छोड़ दिया
हर कदम पर कई निगाहें निगरानी कर रही हैं और हर मोड़ पर लाइसेंस माँगा जाता है, इसलिए ऐ अकबर, मैंने उस पार्क में टहलना ही छोड़ दिया।
7
क्या दीन को क़ुव्वत दें ये जवाँ जब हौसला-अफ़्ज़ा कोई नहीं क्या होश सँभालें ये लड़के ख़ुद उस ने सँभलना छोड़ दिया
ये नौजवान धर्म को क्या ताक़त देंगे जब कोई उनका हौसला बढ़ाने वाला ही नहीं है, और ये लड़के होश क्या सँभालें जब ख़ुद महबूब ने ही सँभलना छोड़ दिया है।
8
इक़बाल मुसाइद जब न रहा रक्खे ये क़दम जिस मंज़िल में अश्जार से साया दूर हुआ चश्मों ने उबलना छोड़ दिया
जब भाग्य अनुकूल नहीं रहा, तो मैंने जिस भी मंज़िल में क़दम रखा, वहाँ पेड़ों से साया छिन गया और झरनों ने फूटना छोड़ दिया।
9
अल्लाह की राह अब तक है खुली आसार-ओ-निशाँ सब क़ाएम हैं अल्लाह के बंदों ने लेकिन उस राह में चलना छोड़ दिया
अल्लाह का रास्ता आज भी खुला हुआ है और उसके तमाम निशान मौजूद हैं, लेकिन उसके बंदों ने ही उस राह पर चलना छोड़ दिया है।
10
जब सर में हवा-ए-ताअत थी सरसब्ज़ शजर उम्मीद का था जब सर-सर-ए-इस्याँ चलने लगी इस पेड़ ने फलना छोड़ दिया
जब मन में ईश्वर की आज्ञाकारिता की चाह थी, तब उम्मीद का पेड़ हरा-भरा था; लेकिन जब गुनाहों की तेज़ हवा चलने लगी, तो उस पेड़ ने फल देना छोड़ दिया।
11
उस हूर-लक़ा को घर लाए हो तुम को मुबारक ऐ 'अकबर' लेकिन ये क़यामत की तुम ने घर से जो निकलना छोड़ दिया
ऐ अकबर, उस हूर जैसी ख़ूबसूरत को घर ले आए हो यह तुम्हें मुबारक हो, लेकिन तुमने यह ग़ज़ब कर दिया कि घर से बाहर निकलना ही छोड़ दिया।
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.