आरज़ू है मुझे इक शख़्स से मिलने की बहुत नाम क्या लूँ कोई अल्लाह का बंदा होगा

“Deep is my longing to meet a certain one; why utter a name, they must be merely a servant of God.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मुझे किसी ख़ास इंसान से मिलने की बहुत तीव्र इच्छा है। मैं उसका नाम क्या लूँ, बस वह भी ख़ुदा का ही कोई बंदा होगा।

विस्तार

इस शेर में एक बहुत ही मासूम तड़प और ख़ूबसूरत पर्दादारी है। शायर किसी से मिलने की दिली ख़्वाहिश तो ज़ाहिर करता है, लेकिन महबूब का नाम छुपाकर उसे सिर्फ़ 'अल्लाह का बंदा' कह देता है। यह सादगी भरी अदा महबूब को ज़माने की नज़रों और बदनामी से बचाने का एक नाज़ुक तरीक़ा है, जहाँ नाम न लेकर भी दिली जज़्बात पूरी शिद्दत से झलकते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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