लतीफ़ ओ ख़ुश-वज़्अ चुस्त-ओ-चालाक ओ साफ़-ओ-पाकीज़ा शाद-ओ-ख़ुर्रम तबीअतों में है उन की जौदत दिलों में उन के हैं नेक इरादे

“Refined and elegant, nimble and alert, spotless, pure, joyful and gay; Brilliance abides within their minds, and noble intentions in their hearts hold sway.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

वे शालीन, सुरुचिपूर्ण, चुस्त, चतुर, पवित्र और प्रसन्नचित्त हैं; उनके स्वभाव में बुद्धिमत्ता और तीव्रता है तथा उनके दिलों में नेक इरादे हैं।

विस्तार

यह शेर उन नेक और होनहार इंसानों—खासकर नौजवानों या बच्चों—की एक बेहद दिलकश तस्वीर पेश करता है। शायर उनके बाहरी सलीके, फुर्ती, पाकीज़गी और ज़िंदादिली की तारीफ़ करते हुए उनके भीतर झांकता है, जहाँ तेज़ ज़ेहन और नेक इरादे बसते हैं। यह शेर हमें याद दिलाता है कि सच्चा इंसान वही है जिसके ज़ाहिरी हुस्न और बातिनी शराफ़त में ऐसा खूबसूरत तालमेल हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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