“Who knows how deeply the masters were aware of Truth divine; They failed to grasp just how straight and direct is this path of mine.”
कौन जाने कि सय्यद सच्चाई से किस हद तक वाकिफ़ थे, क्योंकि वह यह समझ ही न सके कि मेरा रास्ता कितना सीधा है।
इस शे’र में शायर उन पारंपरिक रहबरों और धर्मगुरुओं पर एक मीठी सी चोट करता है, जो दावा करते हैं कि उन्हें रूहानियत और हक़ की पूरी समझ है। वह कहता है कि न जाने वे सच से कितने वाक़िफ़ थे, क्योंकि वे मेरे इश्क़ और साफ़गोई की सीधी राह को भी नहीं समझ सके। दुनियादार लोग जहाँ धर्म को पेचीदा नियमों में उलझा देते हैं, वहीं आशिक़ का रास्ता सीधा, सच्चा और सीधे दिल से ख़ुदा तक पहुँचने वाला होता है।
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