तहसीन के लायक़ तिरा हर शेर है 'अकबर' अहबाब करें बज़्म में अब वाह कहाँ तक

“Every verse of yours is worthy of high praise, O Akbar; how long can friends keep crying 'Bravo!' in the gathering?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

हे अकबर, तुम्हारा हर शेर तारीफ़ के क़ाबिल है, लेकिन महफ़िल में दोस्त आख़िर कब तक और कितनी वाह-वाह करते रहें।

विस्तार

इस शेर में अकबर इलाहाबादी उर्दू शायरी की रिवायत के मुताबिक़ बड़े ही चुटीले अंदाज़ में अपनी तारीफ़ (ताल्ली) कर रहे हैं। वे मज़ाकिया लहज़े में कहते हैं कि उनकी शायरी इतनी लाजवाब है कि महफ़िल में बैठे दोस्त दाद देते-देते थक चुके हैं। यह शेर किसी मुशायरे की उस ज़िंदादिल फ़ज़ा को बयां करता है, जहाँ शाइर अपने हुनर पर नाज़ भी करता है और दोस्तों से मुस्कुराती हुई नोक-झोंक भी।

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