जुनूँ कार-फ़रमा हुआ चाहता है
क़दम दश्त पैमा हुआ चाहता है
“Madness prepares to take command once more; / My feet yearn to measure the desert floor.”
— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ
दीवानगी अब हुक्म चलाने वाली है और मेरे क़दम रेगिस्तान की ख़ाक छानने को बेताब हैं।
विस्तार
यह शेर उस नाज़ुक लम्हे को छूता है जब समझदारी हार मानने लगती है और दिल पर इश्क़ की दीवानगी हुकूमत करने लगती है। शायर के क़दम अब शहर की बंदिशों में नहीं टिकते, वे मजनूँ की तरह उस बंजर सहरा को नापने के लिए मचल रहे हैं। यह दर्द और आज़ादी का ऐसा खूबसूरत मिलाप है, जहाँ रूह सब कुछ भुलाकर सिर्फ़ अपनी दीवानगी में खो जाने को बेताब है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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