“Having lost both heart and faith, we turned toward the idol shrine; here too, O God, You bestowed all upon us.”
हम दिल और ईमान दोनों खोकर मंदिर (बुतख़ाने) की ओर आए थे, लेकिन ऐ ख़ुदा, तूने यहाँ भी हमें सब कुछ अता कर दिया।
शायर कहते हैं कि जब हम अपना दिल और दीन दोनों गंवाकर, मायूस होकर बुतख़ाने (दैर) की तरफ़ आए, तो लगा था कि सब ख़त्म हो गया है। मगर यहाँ भी खु़दा की बेपनाह रहमत ने हमारा दामन नहीं छोड़ा और उसने हमें सब कुछ अता कर दिया। यह शे’र बेहद ख़ूबसूरती से यह एहसास दिलाता है कि इंसान चाहे कितना भी भटका हुआ क्यों न हो, रूहानी सुकून और रब का प्यार किसी मंदिर या मस्जिद की बंदिशों में क़ैद नहीं है।
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