रंज और रंज भी तन्हाई का
वक़्त पहुँचा मिरी रुस्वाई का
“Grief, and that too the sorrow of solitude; the hour of my disgrace has finally arrived.”
— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ
एक तो दुःख और वह भी अकेलेपन का, अब मेरी रुसवाई और बदनामी का वक़्त आ पहुँचा है।
विस्तार
इस शेर में शायर एक दोहरे दर्द को बयां कर रहा है—एक तो ग़म का बोझ और उस पर भी नितांत अकेलापन। जब इंसान अपने आंसुओं को अकेले संभालते-संभालते थक जाता है, तो दिल का हाल छिप नहीं पाता और जग-हंसाई की नौबत आ जाती है। यह तन्हाई सिर्फ खामोशी नहीं लाती, बल्कि आशिक़ के टूटे हुए सब्र को ज़माने के सामने बेपर्दा कर देती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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