जीवन, सच पूछो तो उनका पुतली जैसा है,कभी फैलता है कभी सिकुड़ता है दरिया!
“Life, if you truly ask, is like their pupil,Sometimes it expands, sometimes it contracts, the ocean!”
— अमृत घायल
अर्थ
जीवन उनकी आँख की पुतली जैसा है, जो कभी फैलती है तो कभी सिकुड़ती है, ठीक वैसे ही जैसे समुद्र कभी फैलता है और कभी सिकुड़ता है। यह जीवन के बदलते स्वभाव को दर्शाता है।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी की अनिश्चितता को बहुत खूबसूरती से बयान करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी किसी नदी की तरह है, जो कभी बहुत तेज़ बहती है, कभी धीमी पड़ जाती है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन का प्रवाह स्थिर नहीं होता; इसमें उतार-चढ़ाव, विस्तार और सिकुड़न, दोनों होते रहते हैं। यह एक गहरा दार्शनिक विचार है।
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