दिल क्या अब मैं वापस दुनिया भी नहीं दूंगा, वो भी मुझे पसंद है, ये भी मुझे पसंद है।
“What, should I now not return my heart, nor even the world? I like that too, and I like this too.”
— अमृत घायल
अर्थ
कवि पूछता है कि क्या अब वह अपना दिल, या फिर दुनिया भी वापस नहीं देगा, क्योंकि उसे वह भी पसंद है और यह भी पसंद है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे विरोधाभास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि अब न दुनिया में लौटना है, और न ही इस दुनिया को छोड़ना है। यह एक ऐसी उलझन है, जहाँ मन को शांति भी चाहिए और साथ ही इस जीवन की मिठास भी। यह है ज़िन्दगी का वो अजीब सा जंजाल, जहाँ आप कहीं भी स्थिर नहीं हो पाते।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
