झूठी तो झूठी दिलासा मुझे पसंद है,रेगिस्तान हो मृगतृष्णा का, तो भी मुझे पसंद है।
“Even if false, I like the reassurance,Even if a desert of mirages, I like it.”
— अमृत घायल
अर्थ
मुझे झूठी दिलासा भी पसंद है। अगर रेगिस्तान में मृगतृष्णा हो, तो भी मुझे वह पसंद है।
विस्तार
यह शेर इंसान के दिल की एक बहुत गहरी बात कहता है। शायर कहते हैं कि झूठी दिलासा, झूठी तसल्ली हमें पसंद है। क्यों? क्योंकि हकीकत बहुत कड़वी होती है। यह रेगिस्तान और मृगतृष्णा का ज़िक्र हमें सिखाता है कि कभी-कभी झूठी उम्मीदें, सच की तीखी चोट से कहीं ज़्यादा आरामदायक होती हैं। यह एक बहुत ही दर्द भरा अहसास है।
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