साक़िया! पिए बिना तो नहीं चलेगा मुझसे! तू कहे तो मैं निभा लूँ दिन-रात के बगैर।
“O Saki! Without a drink, I cannot manage! If you say so, I'll manage without day and night.”
— अमृत घायल
अर्थ
हे साकी! मैं पिए बिना नहीं रह सकता। लेकिन, यदि तुम कहो तो मैं दिन और रात के बिना भी अपना गुज़ारा कर सकता हूँ।
विस्तार
यह शेर मोहब्बत की उस हालत को बयां करता है जब आशिक़ का वजूद ही महबूब के दीवानेपन पर टिका होता है। शायर साक़िया से कह रहे हैं कि मेरे लिए तो ये 'पिया' (नशा) ज़रूरी है.... इसके बिना तो मैं ज़िंदा नहीं रह सकता। और ये वादे करना कि तू कह दे, तो मैं दिन-रात के बगैर भी सब सह लूँगा! ये समर्पण है.... एक ऐसा प्यार जो हर हद पार करने को तैयार है।
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