ऐसे थे हम मनस्वी कि इस प्यार में तो क्या कहें, लेन-देन में भी हम प्रतिफल तक न गए।
“So self-respecting were we, that in this love, what to say, Even in dealings, for returns, we never went all the way.”
— अमृत घायल
अर्थ
हम इतने स्वाभिमानी थे कि प्रेम में तो क्या कहें, सामान्य व्यवहार में भी हम कभी प्रतिफल की अपेक्षा तक नहीं गए।
विस्तार
ये शेर सिर्फ़ प्यार की बात नहीं करता, बल्कि निस्वार्थ भावना की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि उनका प्रेम इतना स्वाभाविक और सच्चा था कि उसमें उन्हें किसी तरह का 'बदला' या 'प्रतिफल' की ज़रूरत ही महसूस नहीं हुई। यह दिखाता है कि जब भावनाएं सच्ची होती हैं, तो वे लेन-देन के हिसाब से नहीं चलती। यह इश्क़ की सबसे ऊँची परिभाषा है।
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