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गति की ओर ही नज़रें टिकाए रहे हम कायम, कभी गए ही नहीं भूल से भी विराम की तरफ़

Our gaze remained fixed on motion forever, We never, even by mistake, went towards rest.

अमृत घायल
अर्थ

हमारी नज़रें हमेशा गति और प्रगति पर ही केंद्रित रहीं, और हम भूलकर भी कभी विश्राम की ओर नहीं मुड़े।

विस्तार

ये शेर ज़िंदगी के उस जुनून और रफ्तार को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जब हम किसी मंज़िल की तरफ़ अपनी नज़रें टिका देते हैं, तो कभी भी गलती से या जानबूझकर रुकना नहीं आता। यह एक गहरी बात है कि एक बार जब हम किसी राह पर आ जाते हैं, तो रुकना उतना ही मुश्किल होता है, जितना आगे बढ़ते रहना। यह ज़िंदगी की इसी गतिशीलता का एहसास है।

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