क़ारूँ उठा के सर पे सुना गंज ले चला दुनिया से क्या बख़ील ब-जुज़ रंज ले चला

“Did Qarun carry off his hoard upon his head, they say? / What did the miser take from earth, save sorrow and dismay?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

क्या किसी ने सुना है कि क़ारूँ सिर पर अपना ख़ज़ाना उठा कर ले गया? आख़िर एक कंजूस इस दुनिया से दुःख और अफ़सोस के सिवा क्या लेकर गया।

विस्तार

शायर यहाँ बेपनाह दौलत के मालिक 'क़ारूँ' की मिसाल देकर लालच पर बड़ा ख़ूबसूरत तंज़ कसते हैं। वे पूछते हैं कि क्या कोई कंजूस सचमुच अपने ख़ज़ाने को सिर पर लादकर अगली दुनिया में ले जा सका है? सच तो यह है कि दौलत यहीं ख़ाक में मिल जाती है, और लालची इंसान अपने साथ सिर्फ़ अफ़सोस, रंज और पछतावे की गठरी लेकर रुख़सत होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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