वाक़िफ़ हैं हम कि हज़रत-ए-ग़म ऐसे शख़्स हैं और फिर हम उन के यार हैं हम ऐसे शख़्स हैं

“Well aware are we that Lord Grief is such a formidable soul; and after all, we are his companion—we too are such a soul.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

हम भली-भाँति जानते हैं कि जनाब-ए-ग़म कैसे शख़्स हैं, और फिर हम भी उन्हीं के दोस्त हैं, यानी हम भी वैसे ही शख़्स हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर ने 'ग़म' को एक जीवित शख़्सियत बनाकर उसे 'हज़रत-ए-ग़म' का बड़ा आदरणीय मर्तबा दिया है। वे मानते हैं कि ग़म कोई मामूली चीज़ नहीं बल्कि एक बेहद गहरा और पुरअसर किरदार है, लेकिन इसमें बेचारगी नहीं बल्कि एक निराला अंदाज़ है। शायर बड़े गर्व से कहते हैं कि अगर ग़म इतना ख़ास है, तो हम भी कोई आम इंसान नहीं बल्कि उसी के बराबर के पक्के यार हैं।

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