“The market stalls are closed and the woman is veiled, For the sake of the beloved, my soul is restrained. I cannot bear this separation, my heart is contained, Oh, nightingale, in the garden, please sing your refrain.”
बाजार की दुकानें बंद हैं और औरत घूंघट में है; प्रिय से मिले बिना मेरी जान यूं ही जा रही है। मैं एक पल भी यह बिछोह सह नहीं सकती; मैं बगीचे की बुलबुल हूँ।
इस प्यारे अशआर में, बुलले शाह प्रेम के गहरे और अटल रिश्ते की बात कर रहे हैं। वे कहते हैं कि वे एक पल का विरह भी नहीं सह सकते। उनका प्रेम इतना गहरा है कि उन्हें अपना 'स्वयं' (identity) छोड़कर प्रियतम को पाना होगा। यह एक भावुक विनती है, जो दर्शाती है कि सच्चा इश्क़ बस की सीमाओं से परे है, और उस रहस्यमय प्रेम में पूरी तरह विलीन हो जाना ही एकमात्र रास्ता है।
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