“You do not kill me with your face, Nor do you make me afraid with your gestures. You speak with a heart that is trapped, Now you have shot an arrow, what should I do? Just stop, please stop now.”
आप मुझे अपने चेहरे से नहीं मारते, न ही अपने हाव-भाव से मुझे डराते। आपने एक फँसे हुए दिल से बात की, अब आपने तीर चला दिया, मैं क्या करूँ? बस करो, बस अब करो।
यह शेर प्रेम के उस दर्द को बयाँ करता है, जब महबूब की हर अदा में ज़हर घुला हो। बुल्ले शाह ने यहाँ उस दर्द को बड़ी नज़ाकत से पिरोया है, जहाँ प्यार की बातें भी घाव दे जाती हैं। शायर उस शख़्स से गुहार लगा रहे हैं, जिसने प्यार के नाम पर उन्हें इतना तड़पाया है। यह बस एक दिल से निकली विनती है—बस अब रुक जाओ। यह शेर इश्क़ की गहराई और दर्द की मजबूरी को बयां करता है।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
