“How long will these grievances go on? Half the night has already passed; You too are left distressed and restless, and troubled too am I.”
आपसी शिकवे-शिकायतें आख़िर कब तक चलेंगे जबकि आधी रात तो बीत चुकी है; इस सब से तुम भी परेशान होते हो और हम भी परेशान होते हैं।
यह शेर दो प्यार करने वालों के बीच की उस नाज़ुक घड़ी को बयां करता है, जहाँ तकरार की वजह से कीमती रात बेचैनी में बीत रही है। शायर बहुत अपनेपन से कहता है कि अब इन शिकवों को ख़त्म करो, क्योंकि इस नाराज़गी में दिल सिर्फ़ मेरा ही नहीं, तुम्हारा भी दुख रहा है। यहाँ आधी रात का बीत जाना इस बात का अहसास दिलाता है कि बेमतलब की ज़िद में हम वो ख़ूबसूरत लम्हे गँवा रहे हैं जो सुकून और मोहब्बत से गुज़र सकते थे।
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