“No debt of beauty lingers unpaid; with every charming grace, the dues are repaid.”
हुस्न का कोई भी हक़ बाकी नहीं रहता, क्योंकि वे अपनी हर अदा (नाज़-ओ-अंदाज़) के ज़रिए उसे अदा (पूरा) कर देते हैं।
इस खूबसूरत शेर में 'अदा' लफ़्ज़ की बाज़ीगरी देखने लायक है—एक अदा का मतलब नख़रा या अंदाज़ है, तो दूसरी का मतलब हक़ चुकाना। शायर कहना चाह रहे हैं कि महबूब के हुस्न पर दुनिया या इश्क़ का जो भी क़र्ज़ था, वे अपनी हर दिलकश अदा से उसे पूरी तरह चुका देते हैं। यानी उनकी एक-एक हरकत में इतनी बेमिसाल कशिश है कि देखने वाले का दिल हर शिकवे से आज़ाद होकर बस उन पर निसार हो जाता है।
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