हुस्न का हक़ नहीं रहता बाक़ी हर अदा में वो अदा करते हैं

“No debt of beauty lingers unpaid; with every charming grace, the dues are repaid.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

हुस्न का कोई भी हक़ बाकी नहीं रहता, क्योंकि वे अपनी हर अदा (नाज़-ओ-अंदाज़) के ज़रिए उसे अदा (पूरा) कर देते हैं।

विस्तार

इस खूबसूरत शेर में 'अदा' लफ़्ज़ की बाज़ीगरी देखने लायक है—एक अदा का मतलब नख़रा या अंदाज़ है, तो दूसरी का मतलब हक़ चुकाना। शायर कहना चाह रहे हैं कि महबूब के हुस्न पर दुनिया या इश्क़ का जो भी क़र्ज़ था, वे अपनी हर दिलकश अदा से उसे पूरी तरह चुका देते हैं। यानी उनकी एक-एक हरकत में इतनी बेमिसाल कशिश है कि देखने वाले का दिल हर शिकवे से आज़ाद होकर बस उन पर निसार हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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