तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था

“Whose was that new greeting inscribed within your letter? If not the rival's, whose name was that, after all?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

तुम्हारे ख़त में वह एक नया सलाम किसका था? अगर वह रक़ीब का नहीं था, तो आख़िर वह नाम किसका था?

विस्तार

दाग़ देहलवी का यह मशहूर शेर मोहब्बत में उठने वाले शक, जलन और नोकझोंक को बेहद सादगी से बयां करता है। महबूब का ख़त तो इश्क़ और सुकून का पैग़ाम होना चाहिए था, लेकिन उसमें किसी अजनबी का सलाम देखकर आशिक़ का दिल तिलमिला उठता है। वह तंज़ और दर्द भरे लहजे में सीधा सवाल करता है कि अगर वह तुम्हारा कोई नया चाहने वाला नहीं था, तो फिर इस ख़त में उसका नाम क्या कर रहा था।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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