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कूछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा कुछ फ़िज़ा, कुछ हसरत-ए-परवाज़ की बातें करो

A light, as if filtered through the bars of a cage, Speak of some atmosphere, or of the longing for flight.

फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ

जैसे किसी पिंजरे की सलाखों से छनकर आ रही रोशनी हो, ऐसी कुछ हवा का अहसास, या उड़ान की तीव्र इच्छा के बारे में बात करो।

विस्तार

यह शेर क़ैद और आज़ादी के बीच के गहरे संघर्ष को दिखाता है। क़फ़स की तीलियों से छनकर आती रोशनी उस उम्मीद या सच्चाई की तरह है जो मुश्किल से दिख रही है। लेकिन शायर हमें कहता है कि हम उस रोशनी पर नहीं, बल्कि उस फ़िज़ा और उड़ान भरने की हसरत पर बात करें। यह ज़िंदगी की हर मजबूरी में उम्मीद को ज़िंदा रखने का पैगाम है।

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