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आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक

Love demands patience, yet desire is restless;What hue shall I give my heart, till it bleeds its very essence?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

प्रेम धैर्य चाहता है, पर दिल की इच्छाएँ बेचैन हैं। जिगर का खून होने तक दिल की क्या हालत करूँ?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

कठिन शब्द
صبر طلب
بیتابدل
خون جگر

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