दर्स-ए-तपिश है बर्क़ को अब जिस के नाम से वो दिल है ये कि जिस का तख़ल्लुस सुबूर था

“Lightning now takes lessons in burning heat from its very name; this is that very heart whose pen-name once was patience.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

यह वही दिल है जिसका उपनाम कभी सब्र और धीरज हुआ करता था, लेकिन आज बिजली भी इसके नाम से तपन और जलने का पाठ पढ़ती है।

विस्तार

शायर दिल के एक हैरान कर देने वाले बदलाव की दास्तान सुना रहे हैं। यह वही दिल है जो कभी सब्र और ख़ामोशी की मूरत था, मानो इसका तख़ल्लुस (उपनाम) ही 'सुबूर' यानी धैर्यवान रख दिया गया हो। मगर इश्क़ के दर्द ने इसे इस क़दर सुलगा दिया है कि अब आसमान की बिजली भी तपने और जलने का सबक इसी से लेती है। यह शेर दिखाता है कि जब बहुत गहरा सब्र टूटता है, तो वह सबसे ख़ौफ़नाक आग बन जाता है।

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