Sukhan AI
जाता हूँ दाग़-ए-हसरत-ए-हस्ती लिए हुए हूँ शम-ए-कुश्ता दर-ख़ुर-ए-महफ़िल नहीं रहा

I depart, bearing the scar of existence's desire, An extinguished candle, no longer fit for the assembly's fire.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं अस्तित्व की इच्छा का दाग लिए हुए जा रहा हूँ। मैं एक बुझा हुआ दीपक हूँ, अब महफ़िल के लायक नहीं रहा।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.