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मुँह खुलने पर है वो आलम कि देखा ही नहीं ज़ुल्फ़ से बढ़ कर नक़ाब उस शोख़ के मुँह पर खुला

When her face remains concealed, such is the state that it was never truly seen;A veil, surpassing her locks, unfurled on that playful beauty's face.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

जब उसका मुँह नहीं खुलता (चेहरा नहीं दिखता), तो ऐसी स्थिति होती है जैसे उसे कभी देखा ही नहीं गया। उस चंचल सुंदरी के मुँह पर उसकी ज़ुल्फ़ों से भी बढ़कर एक नक़ाब खुल गया।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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