सब्ज़ा-ए-ख़त से तिरा काकुल-ए-सरकश न दबा
ये ज़मुर्रद भी हरीफ़-ए-दम-ए-अफ़ई न हुआ
“Your untamed tresses, by the facial down, could not be quelled;This emerald, too, could not the serpent's venomous breath have held.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आपके बेलगाम बाल चेहरे पर उगने वाले सब्ज़े (नए रोओं) से दब न सके। यह सब्ज़ा-ए-ख़त, जो ज़मुर्रद (पन्ना) जैसा है, साँप की ज़हरीली साँस का मुक़ाबला न कर सका।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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