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वुसअत-ए-रहमत-ए-हक़ देख कि बख़्शा जावे मुझ सा काफ़िर कि जो ममनून-ए-मआसी हुआ

Behold the vastness of God's mercy, that even I might be forgiven,An infidel like me, who felt no obligation for his sins.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अल्लाह की रहमत की विशालता को देखो कि मुझ जैसे काफ़िर को भी बख़्श दिया जाए, जिसने अपने गुनाहों के लिए कभी शर्मिंदगी महसूस नहीं की।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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