जब वो जमाल-ए-दिल-फ़रोज़ सूरत-ए-मेहर-ए-नीमरोज़
आप ही हो नज़ारा-सोज़ पर्दे में मुँह छुपाए क्यूँ
“When that heart-kindling beauty, like the noonday sun's bright grace,Is itself a scorching sight, why hide its face in a veiled embrace?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जब वह दिल को रोशन करने वाली सुंदरता, दोपहर के सूरज के रूप जैसी है, और खुद ही इतनी तेज़ है कि देखने वाले को झुलसा दे, तो वह परदे में अपना मुँह क्यों छिपाए?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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