क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं
मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ
“Life's captivity, sorrow's bonds, in essence, are the same;Why should man find freedom from grief before death stakes its claim?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जीवन की कैद और दुख के बंधन असल में दोनों एक ही हैं। आदमी मौत से पहले दुख से मुक्ति क्यों पाए?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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