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ता कुजा अफ़सोस-ए-गरमी-हा-ए-सोहबत ख़याल दिल बा-सोज़-ए-आतिश-ए-दाग़-ए-तमन्ना जल गया

How long, O thought, will I lament companionship's warm glow? My heart is consumed by the fire of desire's burning woe.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ऐ ख़याल, मैं कब तक सोहबत की गर्मजोशी का अफ़सोस करूँगा? मेरा दिल तमन्ना के दाग़ की आग की जलन से जल गया है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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