थक थक के हर मक़ाम पे दो चार रह गए तेरा पता न पाएँ तो नाचार क्या करें

“Wearied at every stage, a few fell by the way; finding no trace of you, what could the helpless do?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

सफ़र के हर पड़ाव पर थक-थक कर कुछ लोग पीछे छूटते गए। जब उन्हें तुम्हारा कोई सुराग़ या पता ही नहीं मिलता, तो वे लाचार लोग इसके अलावा और क्या करें?

विस्तार

यह शेर उस अंतहीन तलाश के दर्द को बयां करता है जहाँ मंज़िल का कोई सुराग नहीं मिलता। महबूब या ईश्वर की खोज में एक पूरा कारवां निकला था, लेकिन रास्ते की थकान और कोई पता न मिलने की बेबसी में लोग एक-एक करके पीछे छूटते चले गए। यह किसी की बेवफाई नहीं, बल्कि उस लाचारी की दास्तान है जब इंसान बेपनाह मोहब्बत के बावजूद उम्मीद खो बैठता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.