ज़मज़म ही पे छोड़ो मुझे क्या तौफ़-ए-हरम से
आलूदा-ब-मय जामा-ए-एहराम बहुत है
“Leave me to Zamzam only; what avails the Kaaba's sacred round? My pilgrim's robe, with wine, is far too deeply stained, I've found.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मुझे ज़मज़म के पास ही छोड़ दो; काबा की परिक्रमा करने से क्या फ़ायदा? मेरा एहराम का वस्त्र शराब से बहुत ज़्यादा सना हुआ है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
