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ज़ोहरा गर ऐसा ही शाम-ए-हिज्र में होता है आब परतव-ए-महताब सैल-ए-ख़ानुमाँ हो जाएगा

If tears thus flow in this night of separation,The moon's reflection will become a house-destroying flood.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अगर जुदाई की रात में आँसू इसी तरह बहते रहे, तो चाँद का प्रतिबिंब घर तबाह करने वाली बाढ़ बन जाएगा।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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