गर निगाह-ए-गर्म फ़रमाती रही तालीम-ए-ज़ब्त
शो'ला ख़स में जैसे ख़ूँ रग में निहाँ हो जाएगा
“If a fervent gaze keeps teaching lessons of restraint's decree,The flame in straw, like blood in veins, concealed will be.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि एक गर्म निगाह संयम का पाठ पढ़ाती रहेगी, तो तिनके में आग ऐसे छिप जाएगी जैसे नस में खून छिपा होता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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