ख़्वाहिश को अहमक़ों ने परस्तिश दिया क़रार
क्या पूजता हूँ उस बुत-ए-बेदाद-गर को मैं
“Fools have declared desire to be worship, I vow,What do I worship that tyrannical idol, now?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मूर्खों ने इच्छा को पूजा मान लिया है। मैं भला उस ज़ालिम बुत की क्या पूजा करता हूँ?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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