हर क़दम दूरी-ए-मंज़िल है नुमायाँ मुझ से
मेरी रफ़्तार से भागे है बयाबाँ मुझ से
“With every step, the destination's distance grows apparent before me;The wilderness itself flees from my swift pace.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हर क़दम पर मंज़िल की दूरी की विशालता मुझसे स्पष्ट होती जाती है; मेरी तेज़ रफ़्तार से बियाबान भी मुझसे दूर भागता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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