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ग़म से मरता हूँ कि इतना नहीं दुनिया में कोई कि करे ताज़ियत-ए-मेहर-ओ-वफ़ा मेरे बा'

I die from grief, for there's no one in this world left,Who, after me, will mourn for kindness and love bereft.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं इस दुख से मर रहा हूँ कि मेरे जाने के बाद दुनिया में ऐसा कोई नहीं होगा जो मेहरबानी और वफ़ादारी का मातम मनाए या उन्हें याद करे।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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