जुनूँ गर्म इंतिज़ार ओ नाला बेताबी कमंद आया
सुवैदा ता ब-लब ज़ंजीरी-ए-दूद-ए-सिपंद आया
“Mad passion's fervent wait, and restless lament, became a binding snare,From the heart's dark core to the lips, a chain of rue-smoke did appear.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जुनून का गर्म इंतज़ार और बेचैन नाला एक फंदा बन गया। दिल के गहरे केंद्र (सुवैदा) से होंठों तक, सिपांड के धुएँ की एक जंजीर आ गई।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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