छिड़के है शबनम आईना-ए-बर्ग-ए-गुल पर आब
ऐ अंदलीब वक़्त-ए-वदा-ए-बहार है
“The dew sprinkles water on the mirror of rose petals;O nightingale, it is time for spring's farewell.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ओस गुलाब की पंखुड़ियों के दर्पण पर पानी छिड़क रही है। हे बुलबुल, यह वसंत के विदा होने का समय है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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