कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाए है मुझ से
जफ़ाएँ कर के अपनी याद शरमा जाए है मुझ से
“Should ever a kind thought for me cross their mind, it seems,Then remembering their cruelties, they feel ashamed of their own deeds.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि कभी उनके मन में मेरे लिए कोई अच्छा विचार आता है, तो वे अपनी की गई क्रूरताओं को याद करके शर्मिंदा हो जाते हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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