आतिश-ए-दोज़ख़ में ये गर्मी कहाँ
सोज़-ए-ग़म-हा-ए-निहानी और है
“Where is this heat in the fire of Hell?The burning of hidden sorrows is something else entirely.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
दोज़ख़ की आग में ऐसी गर्मी कहाँ; छिपे हुए दुखों का जलना कुछ और ही होता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
