Sukhan AI
कब से हूँ क्या बताऊँ जहान-ए-ख़राब में शब-हा-ए-हिज्र को भी रखूँ गर हिसाब में

How long I've been in this ruined world, what can I say?If nights of separation, too, I were to reckon and weigh.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

यह बताना मुश्किल है कि मैं इस बर्बाद दुनिया में कब से हूँ, खासकर अगर जुदाई की रातों को भी हिसाब में रखा जाए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.