ब-सइ-ए-ग़ैर है क़त-ए-लिबास-ए-ख़ाना-वीरानी
कि नाज़-ए-जादा-ए-रह रिश्ता-ए-दामान-ए-सहरा है
“By others' efforts, the garment of ruin is but torn and rent, For the proud path itself is but a thread of desert's vestment.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
दूसरों के प्रयासों से घर की बर्बादी का वस्त्र फट जाता है, क्योंकि मार्ग का अभिमान स्वयं ही रेगिस्तान के आँचल का एक धागा मात्र है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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