तसर्रुफ़ वहशियों में है तसव्वुर-हा-ए-मजनूँ का
सवाद-ए-चश्म-ए-आहू अक्स-ए-ख़ाल-ए-रू-ए-लैला है
“Majnun's imaginings hold sway among the wild;The pupil of the gazelle's eye is Laila's mole reflected.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मजनूँ के कल्पनाएँ और विचार जंगलियों पर भी प्रभाव रखते हैं। हिरण की आँख की पुतली वास्तव में लैला के चेहरे पर तिल का प्रतिबिंब है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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