Sukhan AI
जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिन बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए

My heart seeks once again that leisure, night and day,To sit absorbed in thoughts of the beloved, come what may.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरा मन फिर वही फ़ुर्सत ढूँढता है कि दिन-रात बैठे हुए हम अपने प्रिय के ख़यालों में खोए रहें।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.