फिर इस अंदाज़ से बहार आई
कि हुए मेहर-ओ-मह तमाशाई
“Again, with such a splendor, spring has graced,That even sun and moon gaze, quite entranced.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
बसंत फिर से इतनी शान से आया है कि सूर्य और चंद्रमा भी उसे देखने वाले बन गए हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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