Sukhan AI
सब्ज़ा को जब कहीं जगह मिली बन गया रू-ए-आब पर काई

When verdure could not find a place anywhere,It turned to moss upon the water's face.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

जब सब्ज़े को कहीं जगह नहीं मिली, तब वह पानी की सतह पर काई बन गया।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.