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ज़बान-ए-अहल-ए-ज़बाँ में है मर्ग-ए-ख़ामोशी ये बात बज़्म में रौशन हुई ज़बानी-ए-शमअ'

In the tongue of the eloquent, silence is death's embrace,This truth in the assembly, the candle's speech did grace.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

वाक्पटु लोगों की ज़बान में खामोशी मृत्यु के समान है। यह बात महफ़िल में शमअ की ज़ुबानी से स्पष्ट हुई।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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